कई बार मन में ऐसे ख्याल आते रहते हैं कि अब कुछ अलग करना हैं या अब कुछ करके दिखाना हैं,पर ऐसे होसलें धरे के धरे रह जाते हैं जब हम खुद से ही झूठ बोलने लगते हैं।
खुद से झूठ बोलना बहुत महंगा साबित होता हैं
जब आपको लगे कि कुछ करके दिखाना हैं तो दुनिया के आईने में खुद को देखना बंद कीजिये और अपने ही मन के दर्पण में झांककर देखिये,जो आप बाहर ढूंढ रहे हो वो अंदर ही हो,बस एक बार लगन से ढूंढने भर की देर हैं।
दुसरो से जीतना एक बार का आसान काम हैं,खुद से जीतना बहुत मुश्किल होता हैं।
अकेले में दो पल गुजारिए,खुदसे एक बात पूछिये कि क्या वाकई में मैं अपनी ज़िन्दगी जी रहा हूँ या सिर्फ दिन काट रहा हूँ,जिस वक्त आपको ये जवाब मिल जाये तब आप या तो आगे नई राह देखेंगे या फिर वही बैठे बैठे दिन काट देंगे।
आगे बढने का एक ही रास्ता हैं सतत चलना,खुद के प्रति इमानदारी।
किसी ने क्या खूब कहा हैं - रूका हुआ तो पानी भी सड जाता हैं;तो दोस्तों रुकिए मत,कुछ भी करिये पर कुछ करिये जरुर;अपने लिए और अपने सपनो के लिए।
Santosh Yadav
ज़िन्दगी एक किताब की तरह हैं,कुछ पन्नों को आपके सामने लाने की कोशिश हैं बस .............
मंगलवार, 9 फ़रवरी 2016
जब लगे कि अब कुछ करना है....
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