हँसी,जिसका होना सबसे बड़ा सुकूँ हैं;हँसी जो हर दर्द पर मरहम हैं,हँसी अपने आप ने एक धर्म हैं,मजहब हैं,धार्मिकता दिखानी हो तो तो इस धर्म को भी अपनाओ,जितना इस धर्म को आप जियेंगे खुशियाँ पल पल आपको गले लगाएंगी
तो बोलिए बाटेंगे गम और देंगे खुशियाँ।
उम्मीद हैं आप अपना "धर्म" जरुर निभाएंगे।
आपका अपना !सन्तोष!
ज़िन्दगी एक किताब की तरह हैं,कुछ पन्नों को आपके सामने लाने की कोशिश हैं बस .............
बुधवार, 3 फ़रवरी 2016
हँसना जिन्दगी को पहचान देता हैं।
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